Tuesday, January 3, 2017

मेरे अंश



मेरे अंश,
कैसे हो तुम?
क्या तुम मेरे स्पर्श को,
महसूस करते हो?
क्या मेरे हृदय की,
बढ़ी हुई धड़कन को,
तुम भी सुन सकते हो?
क्या तुम्हे पता है,
खुशी के मारे,
रोम रोम सिहर गया था मेरा,
तुम्हारे आने की खबर पाकर।
कांपते हाथों से, 
ऑखे मूंद,
तुम्हे गले लगाया था।
पहली बार।

                                                          मेरे भीतर तुम्हे,
                                                                घुटन सी लगती होगी ना?
तुम्हारी चंचलता के आगे,
यह दुनिया सिमट जाती होगी।
हाथ - पैर चलाते हो,
बेचैन हो, बाहर आने को?
या कुछ कहना चाहते हो?
पर निश्चिंत रहना, सुकून से, 
महफूज हो तुम
मेरी रूह के आगोश मे,
मेरे गर्भ में।

चैन से सोओ, खेलो, कूदो।
और मुझे भी तुम्हे,
महसूस करने दो।
या मन करे तो 
बात कर लिया करो मुझसे,
  हाॅ, मै सुन सकती हूं तुम्हे।
   शब्द - शब्द, हर पल।

बेसब्र है ऑखे,
तुम्हे देखने को। 
और आतुर है मन,
तुम्हारे नाजुक और कोमल,
गालो के चुंबन को।
इस खूबसूरत दुनिया में,
तुम्हारी पहली मुस्कुराहट का,
पहली चहक का,
पहले कदम का,
पहले शब्द का,
मेरे अंश, स्वागत है।।

----- राजेश मीणा बुजेटा

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