Tuesday, January 3, 2017

शायरी - २

डूपहर तक बिक गया!
बाज़ार का हर एक झूट ! और
मैं एक सच ले कर शाम तक
बैठा हे रहा…
खूकर पाने का मज़ा हे कुछ और है
रोकर मुस्कुराने का मज़ा हे कुछ और है
हार तो ज़िंदगी का हिस्सा है मेरे दोस्त
हारने के बाद जीतने का मज़ा हे कुछ और है
तालीम नही दी जाती
परिंदो को उड़ने की.
वो तो खुद ही समझ
जाते हैं उचाई आसमानो की.
मंजिले तो मिलती हैं,
भटक कर ही सही
पर गुमराह तो वा हैं,
जो घर से निकलते ही नही

वो मायूसी के लम्हों में ज़रा भी हौसला देता !तो हम कागज़ की कश्ती पर समुन्दर में उतर जाते !!
तू काम करता गया,
मैं इश्क़ करता गया ...
तेरा नाम होता गया,
मैं बदनाम होता गया

चौड़वी का चाँद हो
या आफताब हो ...
जो भी हो तुम खुदा की
कसम लाजवाब हो
आज उतनी भी नहीं महखाने में ,
जितनी हम छोढ़ दिया करते थे पैमाने में…

आग सूरज में होती है ,
जालना धरती को पडता है.
मोहब्बात आंखेन करती हैं ,
तडपणा दिल को पडता है

दिल के छालों को कोई शायरी कहे,
तो दर्द नही होता
तकलीफ़ तो तब होती है,
जब लोग वा-वा करते हैं
​तेरी हर बात ​मोहब्बत में गवारा करके​;
​दिल के बाज़ार में बैठे है खसारा करके​;
​मुन्तजिर हूँ के सितारों की जरा आँख लगे​;
​चाँद को छत पर बुला लूँगा इशारा करके​;
​आसमानों की तरफ फैंक दिया है मैने​;
​चंद मिटटी के चरागों को सितारा करके​;
​मैं वो दरिया हूँ कि हर बूंद भंवर है जिसकी​;​​
​तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।

​तेरी हर बात ​मोहब्बत में गवारा करके​;
​दिल के बाज़ार में बैठे है खसारा करके​;
​मुन्तजिर हूँ के सितारों की जरा आँख लगे​;
​चाँद को छत पर बुला लूँगा इशारा करके​;
​आसमानों की तरफ फैंक दिया है मैने​;
​चंद मिटटी के चरागों को सितारा करके​;
​मैं वो दरिया हूँ कि हर बूंद भंवर है जिसकी​;​​
​तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।
काश भगवान मुझसे छोड देते किताब बना कर…
वो रात भर हम पढ़ते…
और फिर सो जाते सीने से लगा कर.
दुनिया में धोखा आम बात है।
अब सूरज को ही देख लो
आता है किरण के साथ

रहता है रोशनी के साथ
और जाता है संध्या के साथ।
रोती हुई आँखो मे इंतेज़ार होता है,
ना चाहते हुए भी प्यार होता है,
क्यू देखते है हम वो सपने,
जिनके टूटने पर भी उनके सच होने
का इंतेज़ार होता है?…..
जीत की खातिर बस जुनून चाहिए,
जिसमे उबाल हो ऐसा खून चाहिए,
यह आसमान भी आएगा ज़मीन पर,
बस इरादों मे जीत की गूँज चाहिए.

"अगर ख़ुदा नहीं हैं,
तो उसका ज़िक्र क्यों..
और अगर ख़ुदा है,
तो फिर फिक्र क्यों".
जाती है किसी झील की गहराई कहाँ तक,
आँखोंमें तेरी डूब के देखेंगे किसी दिन…
कहते है जीते हैं उमीद पे लोग
हम को जीने की भी उमीद नही..
हर फूल को रात की रानी नही कहते,हर किसी से दिल की कहानी नही कहते,मेरी आँखों की नमी से समझ लेना,हर बात को हम जुबानी नही कहते.

शेर खुद अपनी ताकत
से राजा केहलाता है;
जंगल मे चुनाव नही होते.. ।।
में बंदूक और गिटार
दोनों चलाना जानता हूं ।
तय तुम्हे करना हे की
आप कौन सी धुन पर नाचोगे..।।
हथियार तो सिर्फ सोंख के लिए रखा करते हे ,
खौफ के लिए तो बस नाम ही काफी हे ।
जिंदगीमें बडी शिद्दत से निभाओ
अपना किरदार,
कि परदा गिरने के बाद भी तालीयाँ
बजती रहे….।।
जी भर गया है तो बता दो
हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं…!
मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं,
मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है….!!
खुद ही दे जाओगे तो बेहतर है..!
वरना हम दिल चुरा भी लेते हैं..!
इतना भी गुमान न कर आपनी जीत पर ऐ बेखबर,
शहर में तेरे जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं..!!
बहुत गुस्ताख है तेरी यादे इन्हे तमीज सिखा दो कमबख्त दस्तक भी नही देती और द्ल में उतर जाती है
बड़ी गुस्ताखियाँ करने लगा है
मेरा दिल अब मुझसे
ये कम्बखत जब से तेरा हुआ है
मेरी सुनता ही नहीं।
एक हद के बाद, दर्द भी दवा बन जाता है,
एक हद के बाद, झूठ भी सच बन जाता है,
यही है असलियत जिंदगी की,
एक हद के बाद, दुश्मन भी दोस्त बन जाता है !!

मौत को तो मैंने कभी देखा नहीं,
पर वो यकीनन बहुत खूबसूरत होगी,
कमबख्त जो भी उससे मिलता है,
जिंदगी जीना ही छोड़ देता है !!
जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है,
थोड़ा रुलाती है थोड़ा हसाती है,
खुद से ज्यादा किसी पे भरोसा मत करना,
क्योंकि अँधेरे में तो परछाईं भी साथ छोड़ जाती है !!
जिंदगी की असली उड़ान अभी बाकी है,
जिंदगी के कई इम्तिहान अभी बाकी हैं,
अभी तो नापी है मुटठी भर ज़मीन आपने,
आगे अभी सारा आसमान बाकी है !! 

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