Tuesday, January 3, 2017

शायरी - १

फिर इश्क़ का जुनूं चढ़ रहा है सिर पे ,
मयख़ाने से कह दो दरवाज़ा खुला रखे !

यूँ तो सिखाने को ज़िन्दगी
बहुत कुछ सिखाती है...!!
मगर---
झूठी हंसी हँसने का हुनर तो
बस मोहब्बत ही सिखाती है...!!

आए बारिश ज़रा थम के बरस,
जब मेरा यार आ जाए तो जूम के बरस,
पहले ना बरस को वो आ ना सके,
फिर इतना बरस की वो जा ना सके…..
सुनो साहब ....!!
ये जो इश्क है ना ...?
जान ले लेता है
मगर फिर भी मौत नहीं आती .............!!
वो नकाब लगा कर खुद को
इश्क से महफूज़ समझते रहे;
नादां इतना भी नहीं समझते कि इश्क
चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है!
वो मेरे दिल पर सिर रखकर सोई थी बेखबर;
हमने धड़कन ही रोक ली कि
कहीं उसकी नींद ना टूट जाए।
इस शहर के बादल तेरी जुल्फ़ों की तरह हैये आग लगाते है बुझाने नहीं आते।क्या सोचकर आए हो मुहब्बत की गली मेंजब नाज़ हसीनों के उठाने नहीं आते।अहबाब भी ग़ैरों की अदा सीख गये हैआते है मगर दिल को दुखाने नहीं आते।
गुज़रे है आज इश्‍क के उस मुकाम से, नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।
​दुःख देकर सवाल...
दुःख देकर सवाल करते हो;
तुम भी जानम! कमाल करते हो;
देख कर पूछ लिया हाल मेरा;
चलो कुछ तो ख्याल करते हो;
शहर-ए दिल में ये उदासियाँ कैसी;
ये भी मुझसे सवाल करते हो;
मरना चाहें तो मर नहीं सकते;
तुम भी जीना मुहाल करते हो;
अब किस-किस की मिसाल दूँ तुम को;
हर सितम बे-मिसाल करते हो।
~ Mirza Ghalib

क्या खबर थी हमे के..
"मोहब्बत" हो जाए गी...
..
..
हमे  तो बस...
तेरा "मुस्कुराना" अछा लगा था..

हम भूल जाते हैं उस के सारे सितम,
जब उस की थोरी सी मुहब्बत याद आती है...!!
जब  टूटने  लगे  हौसले  तो  बस  ये  याद  रखना,
बिना  मेहनत  के  हासिल  तख्तो  ताज  नहीं  होते,
ढूँढ़ ही लेते है अंधेरों  में  मंजिल  अपनी,
जुगनू  कभी  रौशनी  के  मोहताज़  नहीं  होते…..!!!!!!!!!!!
सफ़र में धूप तो होगी, जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में, तुम भी निकल सको तो चलो
किसीके वासते राहें कहाँ बदलती हैं
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो
यहाँ किसीको कोई रासता नहीं देता
मुझे गिराके अगर तुम सम्भल सको तो चलो
यही है ज़िंदगी, कुछ ख़ाक चंद उम्मीदें
इन्ही खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
ग़लतफ़हमियों के सिलसिले इस कदर फैले हैं…
कि हर ईंट सोचती है, दीवार हमहीं से है…

जब चलना नहीं आता तो गिरने नहीं देते थे लोग….
जब से संभाला खुद को कदम कदम पर गिराने की सोचते है लोग….
संघषोॅ मे यदि कटता है तो कट जाए सारा जीवन,
कदम कदम पर समजौता करना मेरे बस की बात नही..!
हम आज भी अपने हुनर मे दम रखते है,
होश उड़ जाते है लोगो के, जब हम महफील में कदम रखते है।।
जिंदगी की असली उड़ान अभी बाकी है
जिंदगी के कई इंतेहाँ अभी बाकी है
अभी तो नापी है मुट्ठी भर ज़मीन हमने
अभी तो सारा आसमान बाकी है…
पल पल तरसे थे उस पल के लिए,
मगर यह पल आया भी तो कुछ पल के लिए ,
सोचा था उसे ज़िंदगी का एक हसीन पल बना लेंगे ,
पर वो पल रुका भी तो बस एक पल के लिए.
सो गए बच्चे गरीब के ये सुनकर …।
ख्वाब में फरिस्ते आते है रोटिया लेकर ……!!

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